‘धोलावीरा’ यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया गया। कच्छ का यह शहर अपनी जवानी के दिनों में कभी क्या खूब रहा होगा। यहां की हर ईंट ने देखा होगा एक मासूम बच्चे की तरह इस शहर का बसना और उजड़ जाना। यहां का हर पत्थर, हर ईंट एक अद्भुत अहसास है, आदि से लेकर के अब तक की यात्रा का। स्कूल की किताबों में कभी पढ़ा था की धोलावीरा, राखीगढ़ी, हड़प्पा, कालीबंगा, लोथल आदि सिंधु सभ्यता के मुख्य स्थल रहें है। कभी इन्ही शहरों के इर्द गिर्द एक जीती जागती दुनिया रही होगी। इन खंडहरों में बीचों बीच कभी हमारे जैसे ही इंसान रहते होंगे, हमारी तरह के मन, मस्तिष्क, भावनाओ वाले। उनके अंदर भी अपनी दुनिया को बहुत दूर तक ले जाने की सोच रही होगी। जो आज प्रकृति के थपेड़ों से बच बचाकर हमारे अंदर भी किसी न किसी तरह से विद्यमान है। हमारी आज की दुनिया से वह कितनी साम्य या अलग रही होगी, मालूम नही; पर इतना तो तय है की हमारी आज की सभ्यता का आधार रही होगी। बचपन से ही ऐसी पुरानी चीजों, पुराने शहरों, खंडहरों के प्रति एक अलग तरह का ही लगाव था। एक बार तो सोच ही लिया था की भारत...