महेंद्रगढ़ , मेरा पिछले 2 सालों से ज्यादा समय से अमेजन , फ्लिपकार्ट और डाक का पता । मैं महेंद्रगढ़ को अक्सर ठहरे हुए शहर के रूप में जानता हूं । यह कैसे मेरे जहन में आया होगा , आप महेंद्रगढ़ एक बार घूम जाएंगे तो आपको मालूम हो जाएगा । लगता है इस शहर को अपनी तरक्की के दिनों से इतनी मुहब्बत हुई कि दुनिया 21 वीं सदी में आ गई और ये वहीं अटका रह गया । यहां ' ठहरना ' महेंद्रगढ़ की तौहीन में लिखा कोई अल्फ़ाज़ नहीं है बल्कि यही ठहरना इस शहर की खूबसूरती भी है । यहां आज भी अधिकतर घर सौ साल पहले बनी उन मजबूत दीवारों पर ही टिके हैं , बस उन्हें अंदर बाहर से थोड़ा सा नयेपन से पोत दिया गया है । बड़ी बड़ी हवेलियां यूं ही पड़ी है । अगर मैं 1947 के ऊपर बन रही किसी फिल्म का डायरेक्टर होता तो सच में महेंद्रगढ़ को ही चुनता । यहां की गलियों , दुकानों और घरों से इस शहर के पुरानेपन के छापे मिटे नहीं हैं । शुरुआती दिनों में मेरे मन में आया कि इस ठहरे हुए शहर प...